Sunday, May 15, 2011

Gaarva - Milind Ingle



गारवा वाऱ्यावर भिर भिर भिर पारवा नवा नवा

प्रिये नभात ही चांदवा नवा नवा



गवतात गाणे झुलते कधीचे

हिरवे किनारे हिरव्या नदीचे

पाण्यावर सर सर सर काजवा नवा नवा

प्रिये मनातही ताजवा नवा नवा



आकाश सारे माळून तारे

आता रुपेरी झालेत वारे

अंगभर थर थर थर नाचवा नवा नवा

प्रिये तुझा जसा गोडवा नवा नवा

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